रास्ते लम्बे तो थे

उसने रंगीन बना दिया

वो तुम्हारे साथ कितनी दूर तक चल सकेगा

इस फैसले पर तुम्हारा कोई हक नहीं!

पर उन साथ चले कदमों में जो खुशी तुम्हे हासिल हुई

वो सिर्फ तुम्हारी है!

ज़िन्दगी खूबसूरत पहले भी थी

आज बस उसके मायने अलग हैं

मंज़िलें तो वही हैं मेरी

अब उन में साथ वो भी रहता है!

जब जब इश्क वाली हवा चली

तब तब तू मेरे आस पास था !

अब सवाल ये है कि…

हवा तेरे आने से चली?

या इश्क तेरे आने से घुला था?

Besharm sa ho kar khadaa tu ilzaam lagata gaya uspe

Kabhi khud se puchha ki usne ungliyan utha kar tujhe jawaab kyu nhi diya palat kar?!

Kitne mein bika zameer tera?

Kya daam lagaya us ainey ka?

Kitne mein khareedee vo neend banjari si?

Kya mila us beghaerat niyat ke badley mein?

Mae puchna chahti hu us insan se jo tere andar mar sa gaya hai… konsa sukun mila tujhe kisi apney ko khoon ke aasu rula kar?