हुए हम उनसे जुदा

या वो हम में ही मौजूद थे?

थी किस्मतें हमारी अलग

या साजि़शें उनकी दूर चले जाने की?

चलो अब जो भी हो…

उनका गया कुछ भी नहीं

और हमारा कुछ बचा ही नहीं!

सुकृती जायसवाल

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वो आँख दिखाए

और हम सिर झुका लें

क्या जि़न्दगी हमारी सिर्फ यहीं तक की है?!

सुकृती जायसवाल

हाल-ए-दिल से तो हमसे हो कर गुज़री हवाएँ भी वाकिफ़ हैं…

लगता है उनका रास्ता कभी आप से नहीं मिला!

—सुकृती जायसवाल

इश्क हुनर था अपना

तो लो! हम उनसे ही कर गए।

वो बेघैरत थे

और हम फिर भी उन पर मर गए।

सुकृती जायसवाल

ओए सुन!

चहरे जो इतने बदलता है तू,

आइने में खुद को कैसे पहचान पाता है?

कुछ यूं उतर गया तू दिल से जैसे किनारों को छू कर गुज़री हो लहर कोई

तेरी निशानियॉ भी रह गई अब एहम नहीं!

हम तो वहीं ठहरे रहे

तू निकल गया आगे

बना ली इक दुनिया तूने जिसमे प्यार का कोई वहम नहीं!

-सुकृती जायसवाल

grate

It is not easy to get red hot
not less stressful to burn yourself

It is neither fraught to give yourself pain Nor is it rotten to get indulged into injuries

Indeed reasonable to question the agony,the sorrow that has brought you up here.

Ask it if it was your fault or destiny!

If it was your fault…you chose it!  If destiny it is…he chose it for you!

But why not?!

When you already know it is gonna take you places, crave a new you within, dance with your demons and shout out red loud that ‘yeah! it took me a century but I here have my ownself.’

And this burnt,red,hot,demon that you posses now is the one you belong to!

the stronger and better you!

Go! heal the world! give the universe a warmth that makes it tastes heaven

because you know, you add the allay.